Gender equality
कहा से शुरू करे?🤔 जेंडर इक्वैलिटी पर सोचने पर मन में पहला ख्याल यहीं क्यों आता हैं की इस में महिला के साथ असमानता होती है, पुरुष का विचार मन में क्यों नहीं आता? जेंडर इक्वैलिटी में तो दौनो आते हैं। सबसे पहले हमें यह मोनोपॉली बदलने की जरूरत हैं। मगर ये सब तब संभव होगा जब हम सब अंदर से एक दूसरे को समान समझने शुरू करेंगे। हमें तो गर्व महसूस होता हैं इस बात का की महिलाएं पुरुषों पे निर्भर है। यही तो पुरुषो की मर्दानगी है। अगर एक महिला अच्छी आजीविका कर के घर का पूरा खर्चा संभालने में सक्षम है और पुरुष उस घर का सारा काम और बच्चों को संभाले तो क्या फर्क पड़ता है? फर्क पड़ता है तो सिर्फ गंदी नाली जैसी सोच का। महिला की नजर में भी एक अच्छी कमाई वाला पुरुष ही आदर्श पुरुष कैसे हो सकता है? कमाई तो में भी कर लूंगी पर तुम घर संभालने में और बच्चो की परवरिश करने में कितने एक्सपर्ट हो ये बताओ जब ऐसे सवाल पूछना शुरू होगा तब जेंडर इक्वैलिटी आएगी। महिलाओं के प्रति सिर्फ सिंपैथी का ढोल बजाने से सम्मान मिलने वाला या जेंडर इक्वैलिटी आने वाली नहीं है, उसके लिए एक विद्रोह की जरूरत है। पुरानी जंजीरो...