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Showing posts from October, 2017

#लप्रेक...लव इन धी टाइम ऑफ बुलेट ट्रेन

आज मैं बुलेट सा फिल कर रहा हूं और तुम रिवॉल्वर सी। तुम बहकी बहकी बातें क्यों कर रहे हो? यार 300km/h की स्पीड से चलने वाली ट्रेन की खबर से तुम्हे खुशी नहीं हो रही? हां... यार अब हमारा मिलना आसान हो जाएगा। लेकिन 2022 तक हमारा प्यार बरकरार रहेगा क्या? प्यार की कोई फेइलिंग डेट नहीं होती। तुम्हें हमारे प्यार पर भरोसा नहीं है? प्यार पर तो भरोसा हैं, लेकिन देखो ना जापान की पहिए बनाने वाली कंपनियां अभी से क्वालिटी टेस्ट में फेल हो रही है। ओह्ह हो.....कोई बात नहीं। हमारा प्यार 300km / h की स्पीड का मोहताज नहीं है । हम 80km/h की स्पीड से सफर कर लेंगे। वैसे भी जापान प्यार करने वालों को कोई लोन नहीं दे रहा।

यह मानसिकता कब बदलेगी?

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फोटो में लिखी गई लाइन एक ऑटो रिक्शा के पीछे लिखी हुई थी। बारिश कि वजह से फोटो खींच नहीं पाया। एसा लिखाने वाले की माँ बहन को बीच में घसीटना में गलत मानता हूँ। यह मानसिकता के नि...

तुम P से प्यार नहीं, पोलिटिकल पार्टी हो। 1). असफल योजनाएं और तुम्हारे झूठे वादे।

तुम्हारी प्यार में बेरोजगारी मुझसे अब देखी नहीं जाती। फिर से तुम झूठी उम्मीद मत जगाओ तुम भी सरकार की झूठी रोज़गारी स्कीम की तरह हो गई हों। तुम हर बात सरकार की बातों से क्यू ...

आते हैं चले जाते हैं....

आते हैं चले जाते हैं जाने वाले कभी कभी यहाँ अपने प्यार से लोगों के दिलोंमे यादगार बन जाते हैं आते हैं चले जाते हैं आते हैं रोना न उदास होना न ये आँसू खोना न यहाँ न दामन भिगोना कभी पाना है कभी कुछ पाना है कभी कुछ खोना है यहं जो होना है होगा वोही यही ज़िन्दगी है यहाँ जिए वोही लोग जो सारे गम भुलाके आंसुओं में मुस्कुराते हैं आते हैं चले जाते हैं आते हैं चलना हैं हमें तो चलना हैं अकेले चलना हैं कोई भी हो या न हो हमसफर राहों में चले या हम रुके रुके या हम चले कहीं भी रुकता नहीं ये सफ़र आना जाना लगे रहे जीवन की राहों में रहे वोही रहते हैं राही बदल जाते हैं आते हैं चले जाते हैं आते हैं रातों के अँधेरे रातों के घनेरे छाये में छुपा तो होगा सवेरा कहीं आएगा सवेरा आएगा उजाले लाएगा अँधेरा होगा हमेशा नहीं माने यहाँ हर न जो कभी किसी हाल में वोही यहाँ फूल कभी काँटों में खिलते हैं आते हैं चले जाते हैं जाने वाले कभी कभी यहाँ अपने प्यार से लोगों के दिलोंमे यादगार बन जाते